Friday, 28 November 2014

Layman's Limerick on 6 Months



कर्मठता को बनाया सन्देश
विकास पुरुष का लिया हैं भेष
हर प्रांत से जोड़ा नाता
कही पुत्र बने कहीं भ्राता
कथन दिया  होगा समावेश।

झूमा तुम्हारे वादों पे  देश
भुला दशक पुराना आवेश
उत्पात से नहीं हैं नाता
बोली न्याय की माता
मातहतों ने न माना आदेश।

देश सत्ता में किया प्रवेश
शुभेक्षा हमारा भी हुआ पेश
कुछ भय हमने भी पाटा
कुछ पर किया सन्नाटा
सोचा समय फिर बदला भेष।

जब योगी बेच रहा था Love द्वेष
एक शब्द से रहता न भय शेष
तुमने होठो को पाटा
हमने दुःख से होठों को काटा
क्या ऐसे होता  हैं समावेश।

विकास तो जैसे भुला देश
तुम गुनगुनाए मेरा प्रदेश
दिमाग ने दिल को डाँटा
वक़्त दे फिर देख फर्राटा
ताने मित्रों के अब देते ठेस।

वज़ीरों का आता नित नया आदेश
ऐसा तो न था  तुम्हारा जनादेश
अलग लगे हैं उनकी गाथा
भाषा पहले या के जाता
कुछ नया  दिखाओअब ,हे जनेश।

काला धन का ठौर हैं  विदेश
समझी जनता छोड़ो उपदेश
घर में फैला हैं आटा
छोड़े अब सैर -सपाटा   
अब क्रियावन्नन का दो आदेश। 

गर्मी बीती सर्द दिखाता आवेश   
आलु प्याज़ करे अब गृह प्रवेश
मधुमाह  खत्म ,हे बड़े भ्राता
चाटुकारिता से सटका माथा
करो कुछ, सम्मानित प्रचार नरेश