कुछ सत्य फ़साने बन जाते हैं - By George
वो समाजवादी नेता थे , साम्यवाद के तरफ ज्यादा झुके हुए। मैंने बचपन में सुना था क़ि उन्होंने विचारधारा को अपने जीवन में ढाल लिया था। चार जोड़ी कुरता पायजामा , दो चमड़े के चप्पल ,एक गमछा और एक टर्किश तौलिया मिल के उनकी जमां -पूँजी बन जाती थी। कँघी कभी किया नहीं , रखा नहीं। 60 -70 के सामजवाद से राजनीती में पैंठ बनाने वाले अधिकांश नेता भ्रष्टाचार के लिए भी काफी बदनाम हुए। उनपे भी आरोप लगे , उनके आधिकारिक घर में बैठी उन्हीं की महिला मित्र का 5 लाख वाला स्टिंग , बहुतों को विचलित कर गया। हतप्रभ थे उनको मानने वाले और उनको कोसने वाले भी। " By George , this is personal vendetta" , यही कहा था उनके सबसे बड़े वैचारिक शत्रु ने। खैर ,सत्ता और भ्रष्टाचार या उसके आरोप पति -पत्नी का स्वरुप हैँ। ज्यादा सुनी-सुनाई पर कथा लम्बी होने का भय हैं।
किन्तु ये सच है की जब विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उन्हें रेल मंत्री बनाया तो तीन दिन तक मंत्रालय नहीं गए। दुविधा इसलिए कि 1974 में एशिया के सबसे बड़े रेल -हड़ताल का मुख्य-कर्ता , क्या टेबल के दुसरे और बैठेगा ?
जब मंत्रालय पहुँचे तो सुरक्षाकर्मी ने उन्हें रिसेप्शन से प्रवेश पर्ची लेने को कहा। प्रीमियर पद्मिनी में आया था भारत का रेल मंत्री , कार्यकाल सँभालने के लिए। ये उनकी गाड़ी थी , चलने वाले ड्राइवर फ्रेड्डी डिसूज़ा उनके मित्र थे , मुंबई से आये थे। फ्रेड्डी उन्हें रेल मंत्रालय का दायित्व लेने को समझाने आये थे।
छह भाईयों में सबसे बड़े , जॉर्ज साहेब को 16 साल की उम्र में St. Peter Seminary , बेंगलुरु भेजा गया था। परिवार के सबसे बड़े पुत्र को रोमन कैथोलिक पादरी बनाया जाता था। अधिशिक्षक और विद्यार्थी के भोजन में अंतर का विरोध ; बैरों , छोटे कामगारों के साथ उनकी दोस्ती ( यूनियन बाजी ) जैसे कारणों से ,वो सपनों के शहर मुंबई निकल लिए 19 साल के होने पर।

उनके छोटे भाइयों की भी अपनी कहानी है। लॉरेन्स को इमरजेंसी में भीतर कर दिया गया , इसलिए कि जॉर्ज साब का ठिकाना मिल जाये। लालकृष्ण आडवाणी ने अपने किताब में लिखा हैं लॉरेन्स के बारे में। जब लॉरेन्स जेल से निकले तो अर्ध -विक्षिपित से रहे बहुत दिनों तक। बाद में वो बेंगलुरु शहर के मेयर भी बने। तीसरे भाई माइकल ने भी पंद्रह महीने जेल में गुजारे , जॉर्ज साब के भाई होने की सजा में। बाद में माइकल दो बार विधायक भी रहे। अल्योशियस को भी जेल हुई। पॉल फर्नांडेस कनाडा में रहते और राजनीति में सक्रिय हैं।
रिचर्ड सबसे छोटे थे , स्वाभाविक है कि जॉर्ज साब के सबसे दुलारे। लोग कहते हैं कि बेंगलुरु जाकर जॉर्ज साब उनसे छद्मवेश में इमरजेंसी के दौरान भी मिलते थे। रिचर्ड भी कनाडा में सक्रिय राजनीति में हैं। करीबी ये कहते हैं 1977 में मंत्री बनने के बाद उन्होंने रिचर्ड और पॉल को कहा की विदेश चले जाओ। मेरे ऊपर और राजनीतिक प्रतारण होगा। स्नेहलता रेड्डी - कन्नड़ अभिनेत्री (निधन - 20 January 1977) के बारे में पढियेगा
पूज्य के वैवाहिक जीवन में बोलना उचित नहीं रहता है।
अनगिनत कहानियाँ , सत्य जुड़े है उनके साथ। सियाचिन वाला आइस स्कूटर ,सर्वे ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट्स , हैरी पोर्टर , आठ या दस भाषाओं पे पकड़ और न जाने कितने। बहुत बाकी हैं। थोड़ा याद नहीं आ रहा , थोड़ा लिखना समय और सीमा के बाहर होगा।
पिछले वर्ष एक शीर्ष अधिकारी के अलमारी के भीतरी पट्टे पर जॉर्ज साब का ये फोटो देखा। वो मुस्कुराए और कहा " सत्ता अंध कर देती हैं , याद दिलाने के लिए कि हम किसलिए हैं। "
इस फ़ोटो को देख कर यदि भारत के युवाओं के लोम सिहरते हैं या भुकुटि तन जाती तो By George .........
उनके छोटे भाइयों की भी अपनी कहानी है। लॉरेन्स को इमरजेंसी में भीतर कर दिया गया , इसलिए कि जॉर्ज साब का ठिकाना मिल जाये। लालकृष्ण आडवाणी ने अपने किताब में लिखा हैं लॉरेन्स के बारे में। जब लॉरेन्स जेल से निकले तो अर्ध -विक्षिपित से रहे बहुत दिनों तक। बाद में वो बेंगलुरु शहर के मेयर भी बने। तीसरे भाई माइकल ने भी पंद्रह महीने जेल में गुजारे , जॉर्ज साब के भाई होने की सजा में। बाद में माइकल दो बार विधायक भी रहे। अल्योशियस को भी जेल हुई। पॉल फर्नांडेस कनाडा में रहते और राजनीति में सक्रिय हैं।
रिचर्ड सबसे छोटे थे , स्वाभाविक है कि जॉर्ज साब के सबसे दुलारे। लोग कहते हैं कि बेंगलुरु जाकर जॉर्ज साब उनसे छद्मवेश में इमरजेंसी के दौरान भी मिलते थे। रिचर्ड भी कनाडा में सक्रिय राजनीति में हैं। करीबी ये कहते हैं 1977 में मंत्री बनने के बाद उन्होंने रिचर्ड और पॉल को कहा की विदेश चले जाओ। मेरे ऊपर और राजनीतिक प्रतारण होगा। स्नेहलता रेड्डी - कन्नड़ अभिनेत्री (निधन - 20 January 1977) के बारे में पढियेगा
पूज्य के वैवाहिक जीवन में बोलना उचित नहीं रहता है।
अनगिनत कहानियाँ , सत्य जुड़े है उनके साथ। सियाचिन वाला आइस स्कूटर ,सर्वे ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट्स , हैरी पोर्टर , आठ या दस भाषाओं पे पकड़ और न जाने कितने। बहुत बाकी हैं। थोड़ा याद नहीं आ रहा , थोड़ा लिखना समय और सीमा के बाहर होगा।
पिछले वर्ष एक शीर्ष अधिकारी के अलमारी के भीतरी पट्टे पर जॉर्ज साब का ये फोटो देखा। वो मुस्कुराए और कहा " सत्ता अंध कर देती हैं , याद दिलाने के लिए कि हम किसलिए हैं। "
इस फ़ोटो को देख कर यदि भारत के युवाओं के लोम सिहरते हैं या भुकुटि तन जाती तो By George .........
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