मतदान
अधीर ना हो , अविश्वस्त ना हो
विचलित ना हो,व्याकुल ना हो
निराश ना हो,हताश न हो
उन्मादि ना हो, अधीन ना हो।
विचलित ना हो,व्याकुल ना हो
निराश ना हो,हताश न हो
उन्मादि ना हो, अधीन ना हो।
परिवर्तन के उत्प्रेरक हम,
संवेदना के प्रचारक हम ,
यत्न के निरंतर हम,
आशा के प्रवाहक हम।
सहस का उद्घोष कर ,
चेतना का प्रशार कर ,
विस्वाश का आगाज़ कर ,
कुछ नव का शुरूवात कर।
अमानवीय से निर्भय ,
अरुणिम आशा सा प्रण ,
माँ मैरी सा वात्सल्य
सुनहली हो जहाँ किरण।
विरासत को न छोड़
संचय करबढा उसे ,
अधिकार से मुँह ना मोड़
यत्न कर कमा उसे।
आया हैं हमारा पंचवर्षीय पर्व ,
उल्लास और हक़ से मना इसे ,मना इसे
पुनरावृत्ति
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