Friday, 4 April 2014

मतदान




मतदान 

अधीर  ना  हो , अविश्वस्त  ना  हो
 विचलित  ना  हो,व्याकुल  ना  हो
 निराश  ना  हो,हताश  न  हो
 उन्मादि  ना  हो, अधीन   ना हो। 




परिवर्तन  के  उत्प्रेरक  हम
,
संवेदना  के  प्रचारक   हम ,
यत्न   के   निरंतर   हम,
आशा  के  प्रवाहक  हम।  



सहस  का   उद्घोष  कर ,
चेतना  का  प्रशार   कर ,
विस्वाश  का आगाज़  कर ,
कुछ   नव  का  शुरूवात  कर। 


अमानवीय  से   निर्भय ,

अरुणिम  आशा  सा  प्रण ,
माँ  मैरी  सा  वात्सल्य
 सुनहली  हो  जहाँ  किरण। 


विरासत  को न छोड़ 

संचय करबढा  उसे ,
अधिकार  से  मुँह  ना  मोड़ 
यत्न कर  कमा  उसे। 


आया हैं हमारा पंचवर्षीय पर्व ,

उल्लास  और हक़ से  मना  इसे ,मना  इसे  

  पुनरावृत्ति 

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